9th month, baby, Micro Fiction, My musings, new born, poetry, poetrybyrashmi

नई मां ( Hindi Poetry)

For the longest I had wanted to talk about body shaming not by men but by our very own girlfriends, female acquaintances. I have been a subject to it and I’m sure you have too! From 48 kgs to 72 kgs (pregnancy) to suddenly shedding weight few months after delivery, I have seen it all in just 5 yrs!

Here is an attempt to talk about what a new mom doesn’t want to hear from her friends who seldom show up and from acquaintances who have perhaps never met in person. We are blessed with beautiful voices and languages, let’s put our words to uplift others❣️❣️❣️

आई जीवन में एक नन्ही सी जान
सोचा एक नया अस्तित्व मिला
मिला मां बनने का सम्मान,
पर अस्तित्व मिला नहीं धुंदली हो गई उसकी अपनी पहचान

एक औरत ही औरत की पीढ़ा समझती है
क्या सच मे समझती है
और समझ के भी उसके ज़ख्मों को कुरेदती है?

अरे ये तो कुछ नहीं आगे देखो क्या होता है कमाल
हमने कैसे तीन बच्चे पाले, तुम तो हो एक ही में बेहाल।
कितनी अच्छी दिखती थी, मोटापे से हो गई हो बेडौल
बच्चा देखो कितना दुबला है, तुम खुद ही हुए जा रही हो ढोल।

रोती चीखें और किलकारियां
नया बच्चा अपने साथ लाता है नई जिम्मेदारियां
जानते हैं सब, मानते भी है सब
फिर भी होते है हैरान सब,
क्योकि बदन दर्द, थकान, अवसाद नहीं हैं कोई बीमारियां।

अवसाद से परेशान नई मां को भी पता नहीं
कि है वो किस की शिकार,
उसकी ही सहेलियां, पड़ोसी आंटीया प्यार से कहती हैं
कि वो हो रही है बेकार।

झाइयां, झुर्रियां, मोटापा कमजोरी
दुबली है, तो कुछ खाती क्यों नहीं?
मोटी है तो कुछ करती क्यों नहीं?
थिन है तो थिन शेमइंग
फैट है तो फैट शेमइंग।

औरत ही औरत को हीन भाव दिलाती है,
सहयोगी हो कर भी हीनता के घूंट पिलाती है।
अगर खुदके लिए सजे तो स्वार्थी हो जाती है,
तभी शायद दोस्तों को जलाने के लिए तैयार होती है।

 

#hindipoetry
#motherhood
#bodyshaming
#momblogger
#bodypositive

Facebook Comments

Leave a Reply

CommentLuv badge