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किश्तों में ज़िन्दगी

रात के सन्नाटे में घड़ी की टिक-टिक अक्सर अहसास देती है,

इस खामोशी से अच्छा साथ तुम्हारे खर्राटों का था!!

जाते हुए मुझे उदास देख
अक्सर तुम मुसकुरा के कहते,
ये आशियां तो  तुम्हारा है ही
अब हमारा ये बिस्तर भी पूरा तुम्हारा

पर  जब से  गए हो तुम
पलंग का वो खाली हिस्सा भी तुमको ही ढूंढता है,
मेरी तरह शायद इसको भी है आदत तुम्हारी

काश तुम समझ पाते
हमारे होने से ही है ये आशियां हमारा पूरा
तुम्हारे बिन अधूरा है ये जहाँ मेरा, ये आशियां हमारा

ये खामोश दीवारें भी अब मानतीं है
इस सन्नाटे से अच्छा तुम्हारा फ़िज़ूल बैठना
और उस पर शोर मेरी किट-किट का था

रात के सन्नाटे में घड़ी की टिक-टिक अक्सर अहसास देती है, इस खामोशी से अच्छा साथ तुम्हारे खर्राटों का था!!

तुम्हारे जाते ही शुरू होता है इंतजार तुम्हारे आने का,
आदत हो गयी है अब मुझे भी किश्तो मे जीने की, जिंदगी निभाने की।।

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2 Comments

  • Reply

    Darshan

    December 15, 2018

    Well written… Keep it going RB 🤗

    • Reply

      Rashmi

      January 4, 2019

      thank you Darshan

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